इंजीनियर बिक रहे हैं कोदो के भाव
इंजीनियर बिक रहे हैं कोदो के भाव , ताऊ मत भेजना अपने बच्चे को बाजार , लगी पड़ी हैं हर गली सपने की दूकान , सीसे के महलों में सजी हैं फीकी पकवान , समय और पैसा लूटा के हो जाओगे लाचार, ताऊ मत भेजना अपने बच्चे को बाजार । आन खातिर तुमसे उसे गॉव बुलाया न जायेगा , शहर में वो अपनी जमीर बेच -बेचकर खायेगा , बुढ़ापे में बेटे का बोझ तुमसे उठाया न जायेगा , समय बीत जाने पर पछताया भी न जायेगा , रोजगार के मर्ज़ का करो कोई और उपचार , ताऊ मत भेजना अपने बच्चे को बाजार । Copyright@Sankalp Mishra