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इंजीनियर बिक रहे हैं कोदो के भाव

इंजीनियर बिक रहे हैं कोदो के भाव  , ताऊ मत भेजना अपने बच्चे को बाजार , लगी पड़ी हैं हर गली सपने की दूकान , सीसे के महलों में सजी हैं फीकी पकवान , समय और पैसा लूटा के हो जाओगे लाचार, ताऊ मत भेजना अपने बच्चे को बाजार । आन खातिर तुमसे उसे गॉव बुलाया न जायेगा , शहर में वो अपनी जमीर बेच -बेचकर खायेगा , बुढ़ापे में बेटे का बोझ तुमसे उठाया न जायेगा , समय बीत जाने पर पछताया भी न जायेगा , रोजगार के मर्ज़ का करो कोई और उपचार , ताऊ मत भेजना अपने बच्चे को बाजार । Copyright@Sankalp Mishra

चलो अपनी कमी छुपाई जाय

 चलो अपनी कमी छुपाई जाय,  लाख कमी दूसरे में गिनाई जाय,  " वो " हमारी तरफ़ देख ही न पायेगा,  अपनी सफाई जो देता रह जायेगा।  सच को अभी आने में देर लगेगी ,  चलो झूठ की दुकान सजाई जाय,  कौन देखता सीरत आज के जमाने में,  चलो झूठ - फ़रेब की सूरत चमकाई जाय।   Sankalp Mishra

Tum kaun ho ?

 तुम कौन हो ? चुपके से मुझे बता दो , मैं किसी को नहीं बताऊंगा , विश्वास करो , मैं तुम्हारी तरह गिरगिट नहीं । न तुम ईमानदार हो , ना देशभक्त , तुम्हे न अपनी चिंता हैं , और न जनता की , तुम्हे न परिवार की चिंता हैं , और न पार्टी की , सब डरे हुए हैं , सब परेशान है , बहुत मर गए , बहुत मरने के कगार पर हैं , बताओ न तुम कौन हो ? क्या चाहते हो ? भगवान हो ? या बनना चाहते हो ? दलाल हो ? पर किसके ? या शैतान हो ? पर क्यों ? या कोई सनकी पागल हो ? बता दो न , करोड़ो लोग ,लाखो गांव , हज़ारो शहर , बस तुम्हारी वजह से , दिन -रात , सुबह - शाम , सब कुछ छोड़छाड़ कर , तुम्हे झेल रहे हैं , बता तो दो आखिर तुम हो कौन ? चलो अपनी नहीं तो लोगो की , खता बता दो , हज़ारो लोग इलाज बिना मर गए , जिम्मेदार कौन बता दो , कुछ तो बताओ , या केवल भाषण दोगे ? जनता कराह रही हैं , त्राहिमाम -त्राहिमाम कर रही हैं , पता नहीं तुम किस मद में हो , न दिखाई दे रहा हैं , न सुनाई दे रहा हैं , ऐसा तो रावण भी न था , ऐसा कंश भी न रहा होगा , न दया , माया , न पात्रता , न सोच , न समाधान , कौन हो  कहाँ से आये ही बता दो न , चुपके से मुझे ,मैं क...

गिद्ध कर रहे लाशों की रखवाली

 गिद्ध कर रहे लाशों की रखवाली हैं,  देख भाई रामराज्य में आई महामारी हैं ।  नेता, अफ़सर, व्यापारी सब लगे हुए है नोचने में,  चौकीदार समझ सता सौपी वो बना हुआ दरबारी हैं ।  सौगंध मुझे इस मिट्टी की देश नहीं बिकने दूंगा,  कह कर राजा बने थे आज कर रहे दलाली हैं  ।

Dar lagta hai

अब तो डर लगता है बोलने से भी इस राज में , श्रीराम बोलकर ना जाने कौन गोली मार दे बाद में । सच , न्याय , समानता सब बकवास है इस राज में , वन्दे मातरम् , जय श्रीराम बाकी सब कुछ बाद में । गाय , बकरी , भेड़ , सुवर सब पर जोर इस राज में  रोटी , रोजगार , शिक्षा , सुरक्षा सब कुछ होगा बाद में । कोर्ट कचहरी अफसर सरकार कोई काम न आएगा , अब तो सड़क पर भीड़ फैसला करेगी इस राज में । Copyright@Sankalp Mishra

Chunaw hai

सड़कों पर लाशों का अंबार देखा हैं,  करोना काल में देश में चुनाव देखा हैं ।  कितनी सस्ती हैं जिंदगी सरहदों पर देखा हैं,  जब भी चुनाव आया सैनिकों को शहीद होते देखा हैं ।  राष्ट्रवाद को मैंने इसी देश में हथियार बनने देखा हैं ,  जब भी चुनाव आया मौत को त्यौहार बनते देखा हैं ।  कौन कहता हैं लोग बिना आँख के बिना अंधे होते हैं,  मैंने जब भी चुनाव आया लोगो को अंधे होते देखा हैं ।  Copyright@Sankalp Mishra
तकलीफ़ क्या हैं ये मुझे बताइये , शर्त हैं लेकिन पहले मुस्कराइये । गांठ सारे खुद ही  खुल जाएंगे , शर्त हैं लेकिन नाकाब तो हटाइये । आपकी तन्हाई दूर हो जायेगी , शर्त हैं लेकिन पहले हाथ तो बढाइये । Copyright@Sankalp Mishra