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Showing posts from March, 2012

नाम हैं नेता

बेशर्म ,बेहया का नाम हैं नेता , सत्ता जिसका ईमान , पैसा जिसका भगवान् हैं , ऐसे आदमी का नाम है नेता . झूठ बोलना काम है , वादा करना पहचान , ऐसे निकम्मों का नाम है नेता . काला धन जिसकी सम्पति हैं ,, अंडरवर्ड जिसकी सेना , ऐसे गद्दारों का नाम है नेता . जो बेचता हैं अपनी बहन को, माँ को टांग देता नीलाम हैं , ऐसी संतान का नाम है नेता . जीप से लेकर तोप तक , कोयला से लेकर कफ़न तक , जो खाता हैं दलाली , ऐसे दलाल का नाम हैं नेता . जो खाता हैं चारा , और करता पगुराई अलकतरा का , ऐसे महामानवो का नाम हैं नेता . नस्लवाद और आतंकवाद , जातिवाद और धर्मवाद , बाँट देना जिसका संस्कार हैं , ऐसे शैतानो का नाम हैं नेता . घोटाला जिसका कर्म हैं , चरित्रहीनता जिसका धर्म , ऐसे कुलसित लोगो का नाम है नेता . खादी पहना करते हैं , तिरंगा बेचा करते हैं , गाँधी के पुरौधो का नाम हैं नेता . चोरी जिसका पेशा हैं , षड़यंत्र जिसकी योग्यता , ऐसे मक्कारों का नाम हैं नेता . अपनी ही बात तीन बार काटा करते हैं , हर चीज़ को तराजू में तौलते हैं , ऐसे दुकानदारों का नाम हैं नेता .

प्रिय तुम्हे जन्मदिन मुबारक

प्रिय तुम्हे जन्मदिन मुबारक , मिले तुम्हे हर गीत , मिले तुम्हे हर प्रीत , समुन्द्र की लहरों पर जीओ तुम , सागर की संगीत मुबारक , प्रिय तुम्हे जन्मदिन मुबारक . आनंद गाये तेरी गली में , प्रेम भरे तेरे आंगन में , दौलत की पुकार बने तू , शौहरत की हर शाम मुबरक , प्रिय तुम्हे जन्मदिन मुबारक .

क्या तुम मुझे भूल जाओगी ?

क्या तुम मुझे भूल जाओगी ? मैं वर्षो से नहीं मिला तुमसे , ना ही सालो से बात की , तो क्या तुम मुझे भूल जाओगी ? वो नदी किनारे की रात , तेरे हाथो में मेरा हाथ , वो स्पर्श तुम छोड़ जाओगी , तो क्या तुम मुझे भूल जाओगी ? ऐ हमसफ़र ! मैं तेरा साथ न दे पाया , तेरे आंचल को थाम न पाया , उन नजरो का जादू तोड़ जाओगी , तो क्या तुम मुझे भूल जाओगी ? तेरी गली नहीं गया , तेरी यादो को वही छोड़ आया , तो तुम रिश्ता तोड़ जाओगी , क्या तुम मुझे भूल जाओगी ? वो दरवाजा जो वापसी का था , मैं उस पर ताला जड़ आया , तो तुम मुझसे मुंह मोड़ लोगी , क्या तुम मुझे भूल जाओगी ?

आरक्षण ने हैं आग लगाई

आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई. योग्यता भरता हैं पानी , अयोग्य मार रहे मलाई , जिसकी मोटी गर्दन हो, उसी को फंसी की हुक्म है आई आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई. गोरा होने पर दंड मिलेगा , काले ने हैं नियम बनाई, आओ भाई ! जश्न मनाये , आज़ादी आई ,बजे शहनाई , आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई. अंधेर नगरी चौपट राजा , टके सेर सब्जी ,टके सेर खज़ा , वही व्यस्था लौट हैं देश जल रहा हाथ सेको मेरे भाई , आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई. सरकारी खर्चे पर बच्चे जनो , जनतंत्र ने धूम मचाई , बतीस रूपये में पेटभर खाओ , सो जाओ बिछा के चटाई , आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई.

आरक्षण ने हैं आग लगाई

आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई. योग्यता भरता हैं पानी , अयोग्य मार रहे मलाई , जिसकी मोटी गर्दन हो, उसी को फंसी की हुक्म है आई आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई. गोरा होने पर दंड मिलेगा , काले ने हैं नियम बनाई, आओ भाई ! जश्न मनाये , आज़ादी आई ,बजे शहनाई , आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई. अंधेर नगरी चौपट राजा , टके सेर सब्जी ,टके सेर खज़ा , वही व्यस्था लौट हैं देश जल रहा हाथ सेको मेरे भाई , आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई. सरकारी खर्चे पर बच्चे जनो , जनतंत्र ने धूम मचाई , बतीस रूपये में पेटभर खाओ , सो जाओ बिछा के चटाई , आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई.

आरक्षण ने हैं आग लगाई

आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई. योग्यता भरता हैं पानी , अयोग्य मार रहे मलाई , जिसकी मोटी गर्दन हो, उसी को फंसी की हुक्म है आई आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई. गोरा होने पर दंड मिलेगा , काले ने हैं नियम बनाई, आओ भाई ! जश्न मनाये , आज़ादी आई ,बजे शहनाई , आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई. अंधेर नगरी चौपट राजा , टके सेर सब्जी ,टके सेर खज़ा , वही व्यस्था लौट हैं देश जल रहा हाथ सेको मेरे भाई , आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई. सरकारी खर्चे पर बच्चे जनो , जनतंत्र ने धूम मचाई , बतीस रूपये में पेटभर खाओ , सो जाओ बिछा के चटाई , आरक्षण ने हैं आग लगाई, घोल दिया मठ्ठा ,मिला दी खटाई.

औरत की आत्मकथा -१

मैं औरत हूँ , मैं सृजन करती हूँ , मैं पालन करती हूँ , देती हूँ पहली शिक्षा , उँगली पकड़ चलना सिखलाती हूँ , देव हो या दानव , उसको मैं संस्कार देती हूँ, एक माँ बन कर . सबसे पहले परिचय कराती हूँ , भावना से ,प्यार से , सह-अस्तित्य समझाती हूँ , रोज़-रोज़ लड़ के सुबह-शाम , रोज़ साथ-साथ बड़ते हुए, एक लड़की से परिचय कराती हूँ , तुम बलवान हो ,तुम रक्षक हो , यह मांग लेती हूँ रक्षाबंधन में , एक बहन बन कर . तुम्हारे कोमल ह्रदय पर राज़ करती हूँ , चाँद ,फूल ,नदी ,सावन , इन सबका तुम्हे अर्थ समझाती हूँ , भावुकता ,चाहत और मोह , मन की चंचलता की शास्त्र पढाती हूँ , घुटने पर खड़ा कर के प्रेमालाप कराती हूँ , एक प्रिय प्रेमिका बन कर , स्त्री की हास्य कला बताती हूँ , हंसी और ठिठोली करती हूँ , वो समस्या सुलझाती हूँ , जो तुम माँ से नहीं कह सकते , वो शास्त्र पढाती हूँ , जिसकी एक किशोर को जरूरत रहती हैं , एक भाभी बन कर . काम ,मोह ,जीवन , परिवार ,बच्चे ,जिम्मेदारी , क्रोध ,निराशा और उदासी . पुरुष की कमजोरी मैं भांप लेती हूँ , जलते रहो वासना में रात-भर , मैं वो देह-आग लगाती हूँ , दुनिया के सबसे बड़े रहस्य से, मैं पर्...