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Showing posts from October, 2013
ये इश्क ये बेरुखी ये तन्हाई कहाँ ले जायेगी , लगता हैं कमबख्त फिर मैखाना ले जायेगी । तेरी कमी इस तरह से फैली हैं मेरी जिन्दगी में , लगता हैं साकी मुझे फिर आजमाने ले जाएगी । तुम्हे भूल ही नहीं पाता पलभर के लिए भी कभी, लगता हैं ये आशिकी अब जनाजे के साथ जायेगी । तुम मुझे याद भी नहीं करती अच्छा हैं जमाने के लिए, गर तुम याद कर लो मुझे  बहुतो की जान जायेगी ।

इंजिनियर भईले बेरोजगार भैया , तोड़ देहले बाबूजी के आस भैया

इंजिनियर भईले बेरोजगार भैया , तोड़ देहले बाबूजी के आस भैया , कहत रहले कि लाखों कमायब , भूजा के भईले भाव भैया , लोगवा अब आपन लइकन के पढ़ावे से डेराता , कहत बा हो जाई इंजिनियर साहब के हाल भैया , इंजिनियर भईले बेरोजगार भैया , तोड़ देहले बाबूजी के आस भैया। खेतवा बेची-बेची बाबूजी पढैले , अब हो ता घरवा नीलाम भैया , कानपूर रहले ,पटना रहले ,लेहले ज्ञान दिल्ली के , सारा पढाई भइल कोदो के भाव भाव भैया , इंजिनियर भईले बेरोजगार भैया , तोड़ देहले बाबूजी के आस भैया। कहत रहले कि पढ़ के मकान बनाइब , बना देहले घरवा के मचान भैया , खात रहले रोजे पिज़्ज़ा -बर्गर , अब खाले बाबूजी के दुत्कार भैया , इंजिनियर भईले बेरोजगार भैया , तोड़ देहले बाबूजी के आस भैया। भैया रहले बाबूजी के बुढौती के लाठी , ई तोड़ देहले खटिया के तार भैया , सुने नी करेले बड़ी फाइन कविता , अब कविते में लोग इनकर उढावे मज़ाक भैया , इंजिनियर भईले बेरोजगार भैया , तोड़ देहले बाबूजी के आस भैया।
मेरे बिस्तर के ठीक नीचे मेरा कंकाल निकला , क़त्ल करने वालों के हाथों में मेरा हथियार निकला . ख़ुदा जानता हैं मेरा मुझसे कैसा रिश्ता था , मेरा जेहन मेरे दुश्मनों का जिगरी यार निकला . खुद की जुबा से बेहतर नहीं बाहरी दुश्मन , जब निकला मेरे आस्त ीन से ही सांप निकला . अदालत अमादा हैं सज़ा देने को मगर किसको ? मैं जिन्दा हूँ मगर मेरे लाश से खंजर निकला .
हास्य -रस ........... घर में कमाई कम हैं , चार भाइयो का घर है , लड़की सुंदर सुशील हैं , अकेली संतान कुलीन हैं , मेरे बापू ने हामी भर दी , और मेरी शादी तय कर दी , मैंने कहा उसको कैसे खिलाऊंगा ? उसके लिए लिपस्टिक पाउडर कहाँ से लाऊंगा ? बापू बोले जो सब खाते हैं वही खाएगी , और दो चार सालो के लिए तो खुद ही ले के आएगी , सगाई ,शादी और विदाई सब हो गया , मैं हँसते इंसान से बेचारा बन गया , लोगो ने बधाई के साथ सलाह पिलाई , मेहनत करो और जल्दी से करो गोद भराई , साल भर में बापू की मुराद पूरी हो गयी , बहू दो जुड़वे बच्चे की माँ बन गयी , मुखिया जी ने सरकार से हमे ईनाम दिलवाया , हमने उन्ही पैसो से गाँव में बतासा बंटवाया , मेरी भी तबियत सरकार की तरह हो गयी हैं , जेब में फूटी कौड़ी नहीं लेकिन सब मज़े में कट रही हैं .