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Showing posts from 2019
आओ नए साल का जश्न मनाए , हंटर के साए में , आओ आजादी के गीत गाए , जनतंत्र के छाए में ।
तुम मुझे मार दो , मेरी हत्या कर दो , पुलिस भेज कर उठवा लो, जेल में ठूंस दो, या राष्ट्रद्रोह का मुकद्दमा लगा दो, या उपद्रवी बता दो , या नक्सली बता दो , या आतंकवादी बता दो , लेकिन सुन लो , मैं डरूंगा नहीं । Copyright@Sankalp Mishra
मल्लिका ने खाया गोश , पचा नहीं पाई, हो गयी बेहोश , मैंने कहा सोनिया से ट्रेनिंग लो , कैसे खाते है मंदिर का सोना , क्या लोगो को बताते हैं , कैसे भरमाते है , कैसे पचाते हैं , कैसे २ग का डकार लगते हैं कैसे भ्रम फैलाते है , लोगो के बोलने पर ,कैसे पिटवाते हैं .                                       Ranjan Mishra
मंदिर कहां , मस्ज़िद कहां ? अब इस चर्चा को विराम दीजिए , आप अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा , एक अदद रोजगार दीजिए । हम हिन्दू हैं वो मुसलमान ये ऐतराज़ बंद कीजिए , मुल्क सबका हैं , सबके पूर्वज इसी मिट्टी में हैं , दबे मुर्दे उखाड़ कर मिलेगा कुछ भी नहीं , कल आज से बेहतर हो इसका इंतजाम कीजिए । गर लगे बांटने  यूं सब कुछ अपनी सहूलियत से , तो हर दीवार , हर गली , हर मकान बंट जाएगा , इंसान बस इंसान बना रहे वो औजार न बन जाए , आज इंसानियत को बचाने का कुछ उपाय कीजिए । Copyright@Sankalp Mishra
कभी महलों से सिक्के मत लो, वो पहले सिक्के देंगे और फिर पूरी दुनियां को बताएँगे कि वो तुम्हे पालते हैं , जैसे कुत्ते पाले जाते हैं , बिल्ली पाली जाती हैं , तुम्हे हर गली , हर नुक्कड़ पर बदनाम करेंगे, तुम्हारी ईज्जत नीलाम टांगी जायेगी । कभी महलों से सिक्के मत लो, भूखे सो जाओ , आसमान के नीचे  धरा के ऊपर रह लो , अपनी निर्धनता को जेवर बना कर पहनो , सहो , संघर्ष करो अगर सह न पाओ तो मर जाओ , लेकिन अपना स्वाभिमान मत बेचो  । Copyright@Sankalp Mishra
तुम मुझे अपमानित करो , मुझे गाली दो , मुझे मारो- पीटो, मेरी हत्या कर दो , क्योंकि मैं हिन्दू नहीं हूँ , न मुस्लिम हूँ , न ईसाई , न पारसी , न बौद्ध , न जैन । तुम मेरी जबाब काट दो , क्योंकि न मैं हिंदी बोलता हूँ, न अंग्रेजी , न उर्दू और न ही फ़ारसी , मुझे न मराठी आती हैं , न तामिल, न बंगला मुझे कोई भाषा नहीं आती । तुम मुझे जेल में डाल दो क्योंकि न भारतीय हूँ , न चीनी , न अमेरिकन, मैं किसी देश का हूँ ही नहीं । तुम मेरा जीना हराम कर दो , क्योंकि न मैं ब्राह्मण हूँ , न राजपूत , न बनिया , और न ही हरिजन , मेरा कोई जाति नही , मेरी कोई पहचान नहीं , मैं तुम्हारा वोटबैंक नही हूँ , और न ही तुम्हारा खरीददार हूँ , मुझे न हथियार खरीदना हैं , और न ही साजो - सामान खरीदना हैं , मैं तुम्हारे झूठ को पकड़ लेता हूँ , और तुम्हारे झूठे वादों को पकड़ लेता हूँ , इसलिए कहता हूँ , मुझे बदनाम करो , अपमानित करो , मारो- पीटो , मेरा हत्या कर दो , क्योंकि मैं स्वतंत्र पक्षी हूँ , ये हवा , ये नदी , ये जंगल , ये पहाड़ , और मैदान सब मेरे हैं , मुझे तुम्हारी कोई जरुरत नहीं ...
वो झूठ को बेचता हैं सच की चासनी लगाकर , वो मौत बेचता है जिंदगी बताकर , उसका यही तो हुनर हैं दोस्तों , वो बारूद बेचता है शांति की क्रांति चलाकर । तुम ना खरीद पाओगे तो पड़ोसी खरीद लेगा , यही बोलकर वो सबको सामान बेच गया , लोग जब तक समझे कि असली माजरा क्या हैं , वो अपनी सारी दुकान बेच गया । मैं इंतजार में था हुनर दिखाने के , वो भीड़ जुटा के मदारी दिखा गया , Copyright @Sankalp Mishra

मुझे तुम्हारी हर शर्त कबूल हैं

मुझे तुम्हारी हर शर्त कबूल हैं , जिसे तुम आजादी कहो वो मंज़ूर हैं , न हक , न हक़ीक़त , न हुकूमत की बात करेंगे , झूठ ही गर सच हैं तो सच की बात करेंगे , झंडे उठाएंगे , गीत गाएंगे , तुम्हारे भाषण सुनेगे और दोहराएंगे , नारे लगाएंगे , और तुम्हारी दी हुई आज़ादी का जश्न मनाएंगे । मुझे तुम्हारी हर शर्त कबूल हैं , जिसे तुम आजादी कहो वो मंज़ूर हैं , तुम जो बोलो वो सुनेगे , तुम जो लिखो वो पढ़ेंगे , जो तुम दिखाओ वो देखेंगे , जो तुम बोलो वो सुनेगे , जो तुम कहो वो करेंगे , जमीन तुम्हे देंगे , पानी तुम्हे देंगे , जंगल तुम्हे देंगे , जवानी तुम्हे देंगे , रवानी तुम्हे देंगे , तुम कहोगे तो जान भी देंगे , लेकिन आज़ादी का जश्न मनाएंगे । Copyright@Sankalp Mishra
तुम मुझे अपमानित करो , मुझे गाली दो , मुझे मारो- पीटो, मेरी हत्या कर दो , क्योंकि मैं हिन्दू नहीं हूँ , न मुस्लिम हूँ , न ईसाई , न पारसी , न बौद्ध , न जैन । तुम मेरी जबाब काट दो , क्योंकि न मैं हिंदी बोलता हूँ, न अंग्रेजी , न उर्दू और न ही फ़ारसी , मुझे न मराठी आती हैं , न तामिल, न बंगला मुझे कोई भाषा नहीं आती । तुम मुझे जेल में डाल दो क्योंकि न भारतीय हूँ , न चीनी , न अमेरिकन, मैं किसी देश का हूँ ही नहीं । तुम मेरा जीना हराम कर दो , क्योंकि न मैं ब्राह्मण हूँ , न राजपूत , न बनिया , और न ही हरिजन , मेरा कोई जाति नही , मेरी कोई पहचान नहीं , मैं तुम्हारा वोटबैंक नही हूँ , और न ही तुम्हारा खरीददार हूँ , मुझे न हथियार खरीदना हैं , और न ही साजो - सामान खरीदना हैं , मैं तुम्हारे झूठ को पकड़ लेता हूँ , और तुम्हारे झूठे वादों को पकड़ लेता हूँ , इसलिए कहता हूँ , मुझे बदनाम करो , अपमानित करो , मारो- पीटो , मेरा हत्या कर दो , क्योंकि मैं स्वतंत्र पक्षी हूँ , ये हवा , ये नदी , ये जंगल , ये पहाड़ , और मैदान सब मेरे हैं , मुझे तुम्हारी कोई जरुरत नहीं ...
वो जो ऊपर बैठे हैं किससे डरते हैं ? सच से ? या सच उजागर होने से ? बर्बाद कर दिया ये सुनने से डरते हैं ? या ताबाह होने की आहत से डरते हैं ? वो जो ऊपर बैठे हैं किससे डरते हैं ? लोगो की अच्छाई से डरते हैं ? या अपनी बुराई से डरते हैं ? हमारे प्यार से डरते हैं ? या अपने गुनाह से डरते हैं ? वो जो ऊपर बैठे हैं किससे डरते हैं ? जाति का जहर नहीं फैलने का डर हैं ? या धर्म का उन्माद नहीं फैलने का डर हैं ? या डर ये हैं कि अब लोग नहीं डर रहे ? आखिर क्या हैं डर ? वो जो ऊपर बैठे हैं किससे डरते हैं ? Copyright@Sankalp Mishra
अब तो डर लगता है बोलने से भी इस राज में , श्रीराम बोलकर ना जाने कौन गोली मार दे बाद में । सच , न्याय , समानता सब बकवास है इस राज में , वन्दे मातरम् , जय श्रीराम बाकी सब कुछ बाद में । गाय , बकरी , भेड़ , सुवर सब पर जोर इस राज में रोटी , रोजगार , शिक्षा , सुरक्षा सब कुछ होगा बाद में । कोर्ट कचहरी अफसर सरकार कोई काम न आएगा , अब तो सड़क पर भीड़ फैसला करेगी इस राज में । Copyright@Sankalp Mishra
अब लोग डरने लगे हैं , दबी जुबां में ही सही , अब लोग मुंह खोलने लगे हैं , कब तक चढ़ा रहेगा झूठ का रंग , पानी पड़ा हैं  आँखों का , रंग अब उतरने लगा हैं । Copyright@Sankalp mishra
पहाड़ को पिघलाउंगा मैं .............................................. ये पहाड़ जो खड़ा है गुनाहों का हैं , ये झाड़ उनके सिपलहारो का हैं , मोमबती जो जनता का हैं , अब इसे जलाऊंगा मैं , और पहाड़ को पिघलाउंगा मैं . ये समुन्द्र जो शांत हैं सब्र का हैं , ये नदी जो इसमें मिलती है कष्ट का हैं , ये हिम जो जनता का हैं , अब इसे गरमाउंगा मैं, और समुन्द्र में भूचाल लाऊंगा मैं . Copyright@Ranjan Mishra
जो प्यार करता हैं , वो बलात्कार नहीं करता, जो प्यार करता हैं , वो धर्म के नाम पर तलवार नहीं चलाता , जो प्यार करता हैं , वो जाति की बात नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो कभी झूठे वादे नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो तहसील में बैठकर घुस नहीं खाता , जो प्यार करता हैं , वो किसी का पसीना नहीं चुराता , जो प्यार करता हैं , वो कभी शराब नहीं पीता , जो प्यार करता हैं , वो कभी जुआ नहीं खेलता , जो प्यार करता हैं , वो नेता बनता हैं लेकिन नेताओ जैसा काम नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो अफसर तो बनता हैं लेकिन अफसरों जैसा काम नही करता , जो प्यार करता हैं , वो वकील बनता हैं लेकिन झूठ का व्यापार नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो मज़दूर बनता हैं लेकिन स्वाभिमान नहीं बेचता , जो प्यार करता हैं , वो किसान बनता हैं लेकिन आत्महत्या नहीं करता , जो प्यार करता है , वो विधार्थी बनता हैं लेकिन वो समय बर्बाद नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो सरकार बनता हैं लेकिन वो तानाशाह नहीं बनता , सच ये हैं कि जो प्यार करता हैं , असल में वही इंसान बनता हैं । CopyrightSankalp mishra