पहाड़ को पिघलाउंगा मैं .............................................. ये पहाड़ जो खड़ा है गुनाहों का हैं , ये झाड़ उनके सिपलहारो का हैं , मोमबती जो जनता का हैं , अब इसे जलाऊंगा मैं , और पहाड़ को पिघलाउंगा मैं . ये समुन्द्र जो शांत हैं सब्र का हैं , ये नदी जो इसमें मिलती है कष्ट का हैं , ये हिम जो जनता का हैं , अब इसे गरमाउंगा मैं, और समुन्द्र में भूचाल लाऊंगा मैं . Copyright@Ranjan Mishra
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जो प्यार करता हैं , वो बलात्कार नहीं करता, जो प्यार करता हैं , वो धर्म के नाम पर तलवार नहीं चलाता , जो प्यार करता हैं , वो जाति की बात नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो कभी झूठे वादे नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो तहसील में बैठकर घुस नहीं खाता , जो प्यार करता हैं , वो किसी का पसीना नहीं चुराता , जो प्यार करता हैं , वो कभी शराब नहीं पीता , जो प्यार करता हैं , वो कभी जुआ नहीं खेलता , जो प्यार करता हैं , वो नेता बनता हैं लेकिन नेताओ जैसा काम नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो अफसर तो बनता हैं लेकिन अफसरों जैसा काम नही करता , जो प्यार करता हैं , वो वकील बनता हैं लेकिन झूठ का व्यापार नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो मज़दूर बनता हैं लेकिन स्वाभिमान नहीं बेचता , जो प्यार करता हैं , वो किसान बनता हैं लेकिन आत्महत्या नहीं करता , जो प्यार करता है , वो विधार्थी बनता हैं लेकिन वो समय बर्बाद नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो सरकार बनता हैं लेकिन वो तानाशाह नहीं बनता , सच ये हैं कि जो प्यार करता हैं , असल में वही इंसान बनता हैं । CopyrightSankalp mishra