चलो अपनी कमी छुपाई जाय
चलो अपनी कमी छुपाई जाय, लाख कमी दूसरे में गिनाई जाय, " वो " हमारी तरफ़ देख ही न पायेगा, अपनी सफाई जो देता रह जायेगा। सच को अभी आने में देर लगेगी , चलो झूठ की दुकान सजाई जाय, कौन देखता सीरत आज के जमाने में, चलो झूठ - फ़रेब की सूरत चमकाई जाय। Sankalp Mishra