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long song

मेरा दिल ,मेरा दिल तुम पर आता रहा , और मैं, तुम्हे देखकर मुस्कुराता रहा ....... ना मैंने कहा ना तुमने कहा , सारा जहाँ सबको बताता रहा , मेरा दिल ,मेरा दिल तुम पर आता रहा , और मैं, तुम्हे देखकर मुस्कुराता रहा ....... मैं कहूँगा कल  दिल की बात तुमसे , ये सोच -सोचकर दिन जाता रहा , मेरा दिल ,मेरा दिल तुम पर आता रहा , और मैं, तुम्हे देखकर मुस्कुराता रहा ....... कह दे आज ही ,कही देर ना हो जाए , यही बात मेरा दोस्त समझाता रहा , मेरा दिल ,मेरा दिल तुम पर आता रहा , और मैं ,तुम्हे देखकर मुस्कुराता रहा ....... दिन देख के गुजरता हैं ,रात आहो में , खोजता मैं रहा सारी रात बाहों में , मेरा दिल ,मेरा दिल तुम पर आता रहा , और मैं ,तुम्हे देखकर मुस्कुराता रहा .......
खुद नहीं ,खुद्दारी मर गयी हैं इनकी , ये बस्तियां अब श्मशान सी लगती हैं . ये नहीं इनकी ज़मीर बेगैरत हैं , इन्सानियत अब अफवाह सी लगती हैं . जिन्दगी नहीं मैं मौत से वाकिफ़ हूँ , जिन्दगी तो अब मेहमान सी लगती हैं . सच नहीं संस्कार मर गए हैं इनके  , ईमानदारी अब तो बीमार सी लगती हैं . शब्द नहीं दिमाग आपाहिज हैं इनके , संसद अब दुकान सी लगती हैं . खिलौने छीन गए बच्चो के हाथो से , घर भी अब बाज़ार सी लगती हैं .

Tum Kya jaano

तुम क्या जानो हौसलों के हूनर को , चल समुन्द्र में नाव चला के देखते हैं . हुस्न के बाज़ार में कुछ तो तेरा मोल होगा , चल आज दूकान लगा कर देखते हैं . सुनते हैं आशिया बिखर जाती हैं किनारों पर , चल किनारों पर मकां बना कर देखते हैं . तुम्हे आँखों के हूनर का इल्म कहाँ हैं , चल एक बार आँख मिला कर देखते हैं .  प्यार की दौलत को खर्च करना हैं अब  , चल एक बार दिल लगा कर देखते हैं . गुमान कि तुम सबसे ज्यादा प्यार करती हैं , चल एक बार माँ से मिल कर देखते हैं . हवाओ में उड़ने वाले सड़क का दर्द क्या जाने , चल एक बार सडक पर उतर कर देखते हैं . जो अनाथ होते हैं कहाँ कोई सहारा होता हैं , चल आज किसी की हाथ थाम कर देखते हैं . एक जो नेता बना कुबेर चाकरी करने लगते हैं , चल हम भी चुनाव लड़ कर देखते हैं .

नेता उवाच

सरहदों पर बहने वाले खून का कोई मोल थोड़ी हैं , हमने मुर्गे पाल रखे थे समय आने पर कट गए . अपने नाकामियों का ठीकरा किस पर फोड़ते , हमने दंगा करा दिए सारे पाप गंगा में धुल गए . गाँधी ,सुभाष ,पटेल को कहाँ खोजते तुम ? वो पुराने ज़माने थे ,गुजर गए . हम चुनाव की चासनी बनाने में व्यस्त थे , चीनी मेहमान बनकर बैठ गए . Copyright@ Sankalp Mishra
जब भी मेरे घाव भरने लगते हैं , सियासत वाले नमक छिड़कने लगते हैं , सदियों से बेरोजगार बैठे हैं मेरे नौजवान , मौसमी दंगे इन्हें रोजगार दिला देते हैं , जिनके घरों में चाकू नहीं सब्जी काटने को , सियासत उन्हें तलवार थमा देती हैं . Copyright@Sankalp Mishra आज कल बहुत प्यार आ रहा हैं , लगता हैं अब चुनाव आ रहा हैं . Copyright@  Sankalp Mishra
(1) गर्म हवाओ से दूर रहा करो ,इसकी सोहबत तबियत बिगाड़ देती हैं , हसीनाऐ तो मासूम होती हैं ,इनकी अदायेगी मौसम बिगाड़ देती हैं , (2) गर दूर तलक जाना हैं तो हल्के कदम चल , लम्बे कदम हर बार हौसले बिगाड़ देती हैं . Copyright@ Sankalp Mishra
सोनिया -उवाच रुपया उठे ,बैठे या डूब जाए हमे क्या ? ये हमारा देश थोड़ी ही हैं , लोग रेल से कटे या दंगे से मरे हमे क्या ? ये हमारा देश थोड़ी ही हैं , लोग लुटे या सपने टूटे हमे क्या ? ये हमारा देश थोड़ी ही हैं , धर्म बंटे ,जाति बंटे या भाषा हमे क्या ? ये हमारा देश थोड़ी ही हैं , एक बार वोट मिल जाए फिर हमे क्या ? ये हमारा देश थोड़ी ही हैं . Copyright@  Sankalp Mishra