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वो न हमसे जुदा हैं , न ही ख़फ़ा हैं बारिश होने वाली हैं , आसमान में उड़ा हैं , देर सबेर ज़मीन पर ही आएगा , मिट्टी हैं न  और कहाँ जायेगा ।। पुचकारेगा , पोलाहेगा दुत्कारेगा , गरियायेगा , फिर तुम्हे रोज रुलाएगा , तुम भी हिसाब लिखते रहो , नेता हैं न , चुनाव में फिर हाथ जोड़े आएगा ।। Copyright@Sankalp Mishra
जो प्यार करता हैं , वो बलात्कार नहीं करता, जो प्यार करता हैं , वो धर्म के नाम पर तलवार नहीं चलाता , जो प्यार करता हैं , वो जाति की बात नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो कभी झूठे वादे नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो तहसील में बैठकर घुस नहीं खाता , जो प्यार करता हैं , वो किसी का पसीना नहीं चुराता , जो प्यार करता हैं , वो कभी शराब नहीं पीता , जो प्यार करता हैं , वो कभी जुआ नहीं खेलता , जो प्यार करता हैं , वो नेता बनता हैं लेकिन नेताओ जैसा काम नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो अफसर तो बनता हैं लेकिन अफसरों जैसा काम नही करता , जो प्यार करता हैं , वो वकील बनता हैं लेकिन झूठ का व्यापार नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो मज़दूर बनता हैं लेकिन स्वाभिमान नहीं बेचता , जो प्यार करता हैं , वो किसान बनता हैं लेकिन आत्महत्या नहीं करता , जो प्यार करता है , वो विधार्थी बनता हैं लेकिन वो समय बर्बाद नहीं करता , जो प्यार करता हैं , वो सरकार बनता हैं लेकिन वो तानाशाह नहीं बनता , सच ये हैं कि  जो प्यार करता हैं , असल में वही इंसान बनत...
बिहार में फेर आईल जंगल -राज , लोगवा के जिंदगी भइल बेहाल , बिहार में फेर आईल जंगल -राज , बिजली -सड़क नइखे कौनो रोज़गार , जेने देखि जाति -धरम के बवाल , बिहार में फेर आईल जंगल -राज। सपना बेचता ,लूटा जाता घर -दुआर , थाना भइल बा चोरन के दरबार , दलाल चालवंत बाड़े बिहार सरकार , बिहार में फेर आईल जंगल -राज , लोगवा के जिंदगी भइल बेहाल। CopyrightSankalp Misra

देशभक्ति क्या हैं ?

देशभक्ति क्या हैं ? एक सैनिक की जवान बीबी को बेवा कर देना , या अबोध बच्चे को अनाथ कर देना , या किशोरो को बरगला कर हथियार थमा देना , समय के साथ आदमी का मज़दूर बनते जाना , या सब कुछ के मालिक चंद लोगो का हो जाना , क्या हैं देशभक्ति ? कोर्ट परिसर में किसी को लतिया देना , या  रोमियो - सुधार दल बना देना , हमारे जिंदगी पर पूर्ण नियंत्रण देशभक्ति हैं , या रोटी देने से पहले टैक्स वसूलता देशभक्ति हैं , क्या हैं देशभक्ति ? सदियों से गरीब और गुलाम बनाये रखना , या क्षेत्र , धर्म , जाति आदि के खाको में बाँटना , लगातार सपने की खेती करते जाना , या हर बार बेचने का नया तरीका अपनाना , हर बार जुमले बेचना देशभक्ति हैं , या अमीरों का सत्ता को रखैल बनाना  देशभक्ति हैं , या गरीबों का सत्ता की गुलामी देशभक्ति हैं , क्या हैं देशभक्ति ? दूर गाँव में आत्महत्या करते किसान के लिए , रोजगार के लिए भटकते नौजवान के लिए , आरक्षण की मार झेलते समाज के लिए , जल -जमीन- जंगल को शहरी भेडियो से बचाने के लिए संघर्षरत आदिवासी नौजवान के लिए , आदमी की आज़ादी के लिए लड़ते लोगो के लिए , क्या हैं देशभक...
यह सड़क हैं या चौराहा हैं ? लगता तो इंसान हैं दिखता मगर साया हैं , यकीं तो आज भी हैं इस शख्स पर , लेकिन कहना पड़ेगा ' आदमी ' बेचारा हैं । मंजिल जब मालुम न हो , राह कौन सही हैं ? कंधे पर उठा लिए हैं बोझ बहुत सारा , और पैर को मालूम नहीं हैं , यह सड़क हैं या चौराहा हैं ? लगता तो इंसान हैं दिखता मगर साया हैं | Copyright@Sankalp Mishra
तुम जो चाहते हो वो मैं बोलूं ? ये कभी नहीं होगा , तुम्हारी जुबान जो गन्दी हैं , वो मेरे मुँह में कभी नही होगा । सत्ता आती हैं जाती हैं लेकिन , मेरा सौदा कभी नहीं होगा , जिसको बिकना हैं वो बिके , सुन ! ये मेरा मकान हैं , कभी नीलाम नहीं होगा । मुझे पत्थर से डराते हो कि सत्ता हैं , मैं तेजाब हूँ लोहे से नहीं डरता , पहली बार भरपेट मिला हैं भोजन इतरा रहे हो ? मैं रियासत को खिलाने वाला हूँ , मुझे भूख नहीं लगता । हाथी मर भी जाए तो लाख टके की होती हैं , मैं तुम्हारे तरह कुत्ता नहीं पालता , दूसरे के सिंदूर से ऐहवाती बनने वाले सुन , हमारी संताने आज भी जिन्दा हैं । Copyright@Sankalp mishra
मैं क्या देखूं , क्या सुनूँ ,क्या सोचूं , ये अखबार बताता हैं । मैं अपने घर में क्या खाऊँ , क्या  पकाउँ , ये जाहिलों का सरदार बताता हैं । जो मुल्क सुई से जहाज तक खरीदता हैं , वो जनता को राष्ट्रवाद पढ़ाता हैं । चाल- चरित्र- चेहरा लिए लडकियाँ उठवाता हैं , मगर समाज को संस्कार सिखाता हैं । कितना असहाय हैं मनुष्य देखों मेरे भाई , रोज लूटता हैं लेकिन वो सरकार बनाता हैं । प्रशासन क्रूर हैं , न्यायलय अंधी वो दर्द किसे सुनाये , जो रोज अपनी जर-जोरू-जमीन लूटवाता हैं । Copyright@Sankalp mishra