तुम मुझे अपमानित करो , मुझे गाली दो , मुझे मारो- पीटो, मेरी हत्या कर दो , क्योंकि मैं हिन्दू नहीं हूँ , न मुस्लिम हूँ , न ईसाई , न पारसी , न बौद्ध , न जैन । तुम मेरी जबाब काट दो , क्योंकि न मैं हिंदी बोलता हूँ, न अंग्रेजी , न उर्दू और न ही फ़ारसी , मुझे न मराठी आती हैं , न तामिल, न बंगला मुझे कोई भाषा नहीं आती । तुम मुझे जेल में डाल दो क्योंकि न भारतीय हूँ , न चीनी , न अमेरिकन, मैं किसी देश का हूँ ही नहीं । तुम मेरा जीना हराम कर दो , क्योंकि न मैं ब्राह्मण हूँ , न राजपूत , न बनिया , और न ही हरिजन , मेरा कोई जाति नही , मेरी कोई पहचान नहीं , मैं तुम्हारा वोटबैंक नही हूँ , और न ही तुम्हारा खरीददार हूँ , मुझे न हथियार खरीदना हैं , और न ही साजो - सामान खरीदना हैं , मैं तुम्हारे झूठ को पकड़ लेता हूँ , और तुम्हारे झूठे वादों को पकड़ लेता हूँ , इसलिए कहता हूँ , मुझे बदनाम करो , अपमानित करो , मारो- पीटो , मेरा हत्या कर दो , क्योंकि मैं स्वतंत्र पक्षी हूँ , ये हवा , ये नदी , ये जंगल , ये पहाड़ , और मैदान सब मेरे हैं , मुझे तुम्हारी कोई जरुरत नहीं ...
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जब न कोई दोस्त हो न दुश्मन, न जीत हो , न हार , न अपना हो , न पराया, तो समझिये कि समय हो गया । न दिन हो , न रात , न उजाला हो,न अँधेरा , न जीने की इच्छा हो ,न मौत की चाह, तो समझिये कि समय हो गया । न माँ हो , न बाप , न भाई हो , न लुगाई , न नाता हो , न कोई रिश्ता , तो समझिये कि समय हो गया । न स्वाथ्य हो , न सम्पति , न प्रतिष्ठा हो , न प्यार , न अकेले हो , न भीड़ में , तो समझिये कि समय हो गया । Copyright@Sankalp Mishra