जब न कोई दोस्त हो न दुश्मन,
न जीत हो , न हार ,
न अपना हो , न पराया,
तो समझिये कि समय हो गया ।
न दिन हो , न रात ,
न उजाला हो,न अँधेरा ,
न जीने की इच्छा हो ,न मौत की चाह,
तो समझिये कि समय हो गया ।
न माँ हो , न बाप ,
न भाई हो , न लुगाई ,
न नाता हो , न कोई रिश्ता ,
तो समझिये कि समय हो गया ।
न स्वाथ्य हो , न सम्पति ,
न प्रतिष्ठा हो , न प्यार ,
न अकेले हो , न भीड़ में ,
तो समझिये कि समय हो गया ।
Copyright@Sankalp Mishra
न जीत हो , न हार ,
न अपना हो , न पराया,
तो समझिये कि समय हो गया ।
न दिन हो , न रात ,
न उजाला हो,न अँधेरा ,
न जीने की इच्छा हो ,न मौत की चाह,
तो समझिये कि समय हो गया ।
न माँ हो , न बाप ,
न भाई हो , न लुगाई ,
न नाता हो , न कोई रिश्ता ,
तो समझिये कि समय हो गया ।
न स्वाथ्य हो , न सम्पति ,
न प्रतिष्ठा हो , न प्यार ,
न अकेले हो , न भीड़ में ,
तो समझिये कि समय हो गया ।
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