उठो तुम तो उठो, जब सब सो गए है, कोई डर कर, कोई हार कर, कोई लालच में, तब तुम तो उठो, ताकि जब तुम्हारे बच्चे पूछे , तुम जाबाब दे सको, कह सको, मै उठा,खड़ा हुआ, पहले अकेले , फिर करवा बनते गया, कह सको, हां हमने संघर्ष किया और जीते.
हर कोई परेशां है , अखबार में अपनी कतरन के लिए , और रख दिए है देख को , बाज़ार में बिकने के लिए. जनता गुलाम है , नेता बईमान, और भगत सिंह ने भी, भुटने टेक दिए है.
देख डायन बैठी सरकार में, खून पीती है, रामलीला मैदान में, देख डायन बैठी सरकार में. मर्द को लील गयी, सास को लील गयी, अब लील रही जनता दरबार को, देख डायन बैठी सरकार में. जिस्म से जज्बात तक, आनाज से औजार तक, हत्या से हथियार तक, सब इसके व्यापार है, देख डायन बैठी सरकार में. विदेशी दालाल, जनता गुलाम, सत्ता को रखैल बना कर, देख डायन बैठी सरकार में
देख डायन बैठी सरकार में, खून पीती है, रामलीला मैदान में, देख डायन बैठी सरकार में. मर्द को लील गयी, सास को लील गयी, अब लील रही जनता दरबार को, देख डायन बैठी सरकार में. जिस्म से जज्बात तक, आनाज से औजार तक, हत्या से हथियार तक, सब इसके व्यापार है, देख डायन बैठी सरकार में. विदेशी दालाल, जनता गुलाम, सत्ता को रखैल बना कर, देख डायन बैठी सरकार में