हर कोई परेशां है

हर कोई परेशां है ,
अखबार में अपनी कतरन के लिए ,
और रख दिए है देख को ,
बाज़ार में बिकने के लिए.
जनता गुलाम है ,
नेता बईमान,
और भगत सिंह ने भी,
भुटने टेक दिए है.

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