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Legal Articles The History, Rationale and Critical Analysis of Reservations under the Constitution of India The facet of social justice been held by the Supreme Court of India to be a part of the “basic structure” of the Constitution of India. “Reservations” for underprivileged persons in public institutions is one of the policies devised by the Indian Legislature to espo u se the cause of the disadvantaged. In 2007, the UPA led government introduced an additional 27% reservation for “Other Backward Classes” in educational institutions. The said move was met with severe criticism from certain quarters of the society especially from the student community. This article seeks to trace the history of reservations and discusses the social and constitutional problems with the help of paradigm case laws. The article seeks to explain the need to preserve the policy of reservations but makes it clear that the same must be done subject to certain limitations. The article also serves as a cri...

आरक्षण अंगार हैं

आरक्षण अंगार हैं , पैदा करता भंगार हैं , फैलता है असंतोष , निराशा , असंतुलन , अपराध , तोड़ता है समाज , घोलता हैं जहर , करवाता है आत्महत्याएं , छीनता हैं मानव-अधिकार , अक्षम को दर्ज़ा देता है सक्षम का , आज मेरी ललकार हैं , आरक्षण अंगार हैं , पैदा करता भंगार हैं

आरक्षण हमारी नियति नहीं

आरक्षण हमारी नियति नहीं , हमारे मौन का नतीजा हैं , गुलाम थे लोग इस देश के, हमने आजाद कराया , इनको नरक से निकला , ताकि सम्मान से जी सके , अपनी रोटी कमा सके , हमने अपने बेटो का बलिदान दिया , एक -एक कतरा रक्त का दान दिया , ताकि लोग आगे बढ सके , साँस ले सके खुली हवा में , जी सके अपनी जिन्दगी , इनका ये अहसान चुकाने का सलीका है , आरक्षण हमारी नियति नहीं , हमारे मौन का नतीजा हैं . .................. Ranjan Mishra

जो सच के पक्षधर है

जो सच के पक्षधर है , वो जानते है सच को , वो हिटलर को गलत नहीं मानते , न ही सद्दाम हुसैन को , न ही ओसामा-बिन-लादेन को , वो जानते हैं ये पैसेवाले कलयुगी , दूसरा रास्ता नहीं छोड़ते , सम्मान से जीने का . हथियार उठाना पड़ता है रक्षा के लिए , अपने जमीन के, अपने जमीर के , अपने जलवायु के , अपने जल के ,तेल के , अपने बच्चो के भविष्य के लिए , उन्हें लड़ना पड़ता है और जान देनी पड़ती हैं . लेकिन दुःख इसका हैं कि ये भी इन साम्राज्यवादियों के योजना का हिस्सा हैं , ये जानबुझकर सारा खेल खेलते हैं और अंत में खुद को देवता घोषित करते है और उन बेचारो को रावण . जो सच के पक्षधर हैं वो जानते है सच को कि कुरुक्षेत्र में लड़ाई , दुर्योधन और अर्जुन कि नहीं थी , लड़ाई तो कृष्ण कि थी , ये तो मोहरे थे ,बस मोहरे लेकिन दुःख कि बात है कि जो सच के पक्षधर हैं वो सच लिख नहीं पाते , वो राजा के संरक्षक बन जाते हैं और सच को ममोड़ देते है .

आरक्षण काफी हैं

ये यमराज ! तू जा , हमारे लिए आरक्षण काफी हैं , तुम्हे जान चाहिए न , या कष्टों का का अम्बार लगाना है ? तू चिंता मत कर जा , हमारे लिए आरक्षण काफी हैं . ये असाध्य बीमारियो ! तुम सब जाओ तुम्हे दर्द देना हैं न , भयातुर और चिंतित करना है न, दलिद्र बनाना है न, दिवालिया और फटेहाल करना हैं ? तुम सब चिंता मत करो ,जाओ हमारे लिए आरक्षण काफी हैं . ये डाकुओं ! तुम सब जाओ हमारे घरो को लूटने , बच्चो का क़त्ल करने , या बेटियो को नाश करने , के लिए आरक्षण काफी हैं

आरक्षण क्यों ?

आरक्षण क्यों ? अपनी कमी छुपाने के लिए , या अपंग हो ये बताने के लिए ? क्यों हो आरक्षण ? कुकुरमुत्ते की तरह पैदावार बड़ा कर , जनतंत्र बने हो इसलिए , या मंद-बुद्धि ,अक्षम हो इसलिए ? सदियों गुलाम रहे ही इसलिए , या बईमान,मक्कार हो इसलिए ? क्यों हो आरक्षण ? तुम काले हो इसलिए आरक्षण चाहिए , या दिल,दिमाग काला है इसलिए आरक्षण चाहिए ? क्यों चाहिए आरक्षण ? अगर तुम्हारी आत्मा जिन्दा हो तो बोलो , अगर संजीदा हो तो बोलो , क्यों चाहिए आरक्षण ? पत्तल चाटने के लिए ? या पूरी बारात लूट खाने के लिए ? छोडो ,तुम क्या बोलोगो दलिद्र मैं बताता हूँ यह कलयुग है कलयुग में कौवों की सत्ता होती है , और सुअरों की सरकार , हंस दाना चुन्गते हैं कौवा राज भोगते हैं.