आरक्षण हमारी नियति नहीं
आरक्षण हमारी नियति नहीं ,
हमारे मौन का नतीजा हैं ,
गुलाम थे लोग इस देश के,
हमने आजाद कराया ,
इनको नरक से निकला ,
ताकि
सम्मान से जी सके ,
अपनी रोटी कमा सके ,
हमने अपने बेटो का बलिदान दिया ,
एक -एक कतरा रक्त का दान दिया ,
ताकि
लोग आगे बढ सके ,
साँस ले सके खुली हवा में ,
जी सके अपनी जिन्दगी ,
इनका ये अहसान चुकाने का सलीका है ,
आरक्षण हमारी नियति नहीं ,
हमारे मौन का नतीजा हैं .
..................Ranjan Mishra
हमारे मौन का नतीजा हैं ,
गुलाम थे लोग इस देश के,
हमने आजाद कराया ,
इनको नरक से निकला ,
ताकि
सम्मान से जी सके ,
अपनी रोटी कमा सके ,
हमने अपने बेटो का बलिदान दिया ,
एक -एक कतरा रक्त का दान दिया ,
ताकि
लोग आगे बढ सके ,
साँस ले सके खुली हवा में ,
जी सके अपनी जिन्दगी ,
इनका ये अहसान चुकाने का सलीका है ,
आरक्षण हमारी नियति नहीं ,
हमारे मौन का नतीजा हैं .
..................Ranjan Mishra
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