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Showing posts from August, 2011

किसको दिल दे बैठे हो ?

किसको दिल दे बैठे हो ? सावधान रहना, सुना है आज कल दुकानदारी बहुत है. किसको दिल दे बैठो हो ? संभल जाओ, सुना है आजकल प्यार में मारामारी बहुत है. किसको दिल दे बैठे हो ? यार यहाँ बैठो मेरे पास, जाम छलकाओ, दुनिया में ये बीमारी बहुत है. किसको दिल दे बैठे हो ? अपने अंदर जाओ , सुना है बाहर नफरत बहुत जयादा है.

आरक्षण क्या है ?

आरक्षण क्या है ? अगुठे को काट कर , तीर चलाने का फरमान, या पैर बांध कर , दौड़ने को कहना. क्या है आरक्षण ? किसी के हक को मार कर इतराना , या खैरात खाने की आदत, या किसी को धीरे-धीरे मौत की तरफ दकेल देना, या किसी के खुदकुशी का कारण बन जाना, क्या है आरक्षण ? समानता के नाम पर , किसी के सपने छीन लेना, या संख्या के दम पर, लोगो को कुचल देना, आरक्षण क्या है ? मेहनत कर के आगे आये लोगो को, मिटा देने का अहसास, या अक्षम लोगो को, कुर्सी दिला देने का गर्व, क्या है आरक्षण ? उपले में घी डालने का काम, या कोयले में साबुन रगड़ने का पराक्रम , या अग्नि-बीज रोपते जाना , और विस्फोट का इतंजार करना. क्या है आरक्षण ? जीने की जेह्दोजेहद में , किसी की सांसे छीन लेना, या अनजाने समानता की तलाश में, जिन्दगी का नरक बनते जाना, जातियों के इस लड़ाई में, आरक्षण क्या है ? एक गरीब भूखे ब्रह्मण के लिए, आरक्षण क्या है ? शायद एक श्राप , शायद एक पाप, एक अपराध, इस देश में जन्म लेने का.

I love girls by heart but hate by mind.

I love girls by heart but hate by mind.
मैंने तेरे लिए घर -वार छोड़ा , और तू कहती है बेवफा हु मै. और तू कहती है बेवफा हु मै. मै तेरे पीछे-पीछे यहाँ तक आया , और तू कहती है बेवफा हु मै. रात -दिन तेरे लिए जिया , और तू कहती है बेवफा हु मै.

मै तेरे इश्क में दिनभर चलता रहा,

मै तेरे इश्क में दिनभर चलता रहा, और फिर रात हो गयी. तुम्हे पता भी नहीं चला , कि एक चकोर था.

देश से पूछो

शीर्षक ---- देश से पूछो लोग अब सच नहीं बोलते, संख्या देखते है , सुना है जनतंत्र आया है , अब काबिल लोगो की पूछ नहीं . क्यों ? मुझसे मत पूछो. रात में अब चाँद नहीं निकलता , सो जाता है चादर तन कर .क्यों ? मुझसे मत पूछो. कोयल नहीं गाती अब बागो में, अब कौवे गाते है. हंस अब दाना नहीं चुगते,क्यों ? मुझसे मत पूछो.

देश से पूछो

शीर्षक ---- देश से पूछो प्यार एक शब्द ? क्या काफी है ये ? मुझसे मत पूछो. क्या तुम प्यार करते हो ? बोलो हाँ ! किससे ? मुझसे मत पूछो. बाहर भीड़ खड़ी है झंडे लिए, पुकार रही है .किसे ? मुझसे मत पूछो. क्या तुम प्यार करते हो ? तुम्हारी माँ,तेरे बच्चे , राखी लिए तेरी बहन, धिक्कार रही है .किसे ? मुझसे मत पूछो. क्या तुम प्यार करते हो ? मिटटी ,बाग़,बगीचे , नदिया,खेत ,पहाड़ सब लूटी जा रही है .क्यों ? मुझसे मत पूछो.
कुतर्क ,भ्रम और षडयंत्र , साम,दंड और भेद , सब कर के थक गयी सरकार, अब करेगी दंडवत प्रणाम.

जय जन !जय जन क्रांति !

जय जन !जय जन क्रांति ! तेरी हर पथ पर विजय हो. ललकार के चल,गरज के चल, भारत माँ को पुकार के चल, लग गया है जो दीमक , उसको जला कर चल, जय जन !जय जन क्रांति ! तेरी हर पथ पर विजय हो. खुद चल,औरो का हाथ थाम कर चल, स्वर में स्वर मिला कर चल, पत्ता तो हिल गया है, अब जड़ो को उखाड़ के चल, जय जन !जय जन क्रांति ! तेरी हर पथ पर विजय हो. घुस गए है चोर घरो में, उनको सबक सिखा के चल, भारत माँ के मिटटी को, माथे से लगा के चल, जय जन !जय जन क्रांति ! तेरी हर पथ पर विजय हो.

आग लग गयी है,

आग लग गयी है, अब घी डालो, बज गया है बिगुल, अब अपना रक्त डालो, सोचो मत क्या होगा, अब कूद जाओ रण में, और नीव हिला डालो. बहुत सह चुचे दोस्तों, अब और नहीं बस यही बता डालो, आग लग गयी है, अब घी डालो. पत्थर होगा तो चूर होगा, समुन्द्र होगा तो वो धूल होगा, ये जन आंधी है, अब हर समस्या दूर होगा.

हम जकड़े हुए है खुद के जाल में

हम जकड़े हुए है खुद के जाल में, हमारी कमजोरिया , हमारे भय, हमारे तनाव , हमारी मजबुरिया, हमारी बुरी आदते, हमे खाए जाती है. हम जकड़े हुए है खुद के जाल में, आलस ने घेर रखा है, गुस्सा आगे नहीं बड़ने देती, तन्द्रा के शिकार हम, खुद पर विश्वास खो बैठे है. हम जकड़े हुए है खुद के जाल में, भ्रम फैला है चारो तरफ, फैसले नहीं ले पाते हम , किस गली हमे जाना है, एक गली जाते है, फिर लौट कर दूसरी गली पकड लेते है, फिर तीसरी,चौथी,अनंत गलिया है, और हर गली में हम जाना चाहते है, और अंत में हम कही नहीं जा पते, क्यों की हम जकड़े हुए है खुद के जाल में.

मुंह चिड़ाते नेता

मुंह चिड़ाते नेता , और हम चुप रहते है. जनता के ये सेवक, हमे लूट खाते है, और हम चुप रहते है. जिसका सरोकार लोगो के रसोई से, उसकी चर्चा में संसद खाली रहती है, जिसका सरोकार है लोगो के कमाई से, उसकी चर्चा में संसद खाली रहती है, जिस दिन चर्चा होती है मंहगाई पर, उसकी चर्चा में संसद खाली रहती है, और हम चुप रहते है. और जब बात हो अधिकार की, जब बात हो खैरात खाने की, जब बात हो लाठी उठाने की, जब बात हो लोगो को लतियाने की, ये सबसे आगे खड़े होते है, और हम चुप रहते है.

बहुत हुआ अँधेरा

बहुत हुआ अँधेरा , अब हम उजाला लायेगे . बोल दो हवा से कि आराम करे, अब हम हर गली में तूफान लायेगे. बोल देना अपने राजा से, बनवा ले काल- कोठरिया, अब हम जन-सैलाब लायेगे. बचा सकते हो तो बच लो, अब तेरे दरबार में कोहराम लायेगे. जला लो मशालो को , थाम लो हाथ से हाथ, अब हर हाथ में शोले जलायेगे . बोल देना माँ से कि रोना मत, अब हम तेरे हर आंसू का , हिसाब लायेगे. बहुत किये अत्याचार , बहुत किये भारस्ताचार , अब तेरे हर जुल्म का इंतिकाम लायेगे.

हाय रे सरकार ! थू ! थू !

हाय रे सरकार ! थू ! थू ! लाठी के दम पर, पैसे के दम पर, दालालो के दम पर , विदेशी के हाथ में बैठी, हाय रे सरकार ! थू ! थू ! आजाद है यह देश , पर बोलने पर पाबंदी, विरोध पर पाबंदी , संविधान पर पाबन्दी, मानव अधिकार पर पाबंदी, जाति के जोड़-तोड़ से चलती, हाय रे सरकार ! थू !थू !

भूख की मारी जनता

भूख की मारी जनता, लाठी खाने को तैयार है, पानी जब घर में घुस गया है, बुड्डे भी तैरने को तैयार है. यह भूख की मरी जनता है, बिक जाती है दो रोटी पर, अब जब रोटी भी छीन रहा है, लड़ने को तैयार है. यह भूख की मरी जनता है, इसे आसरा चाहिए बस कल का, एक घर अपनी बच्चो के लिए, और एक छोटा आश्वासन , कि वह अपनी कोने में बस जी सके, लेकिन इतना भी जब नहीं मिल रहा, वह सब कुछ खोने को तैयार है.

आज कल रात नहीं होती

आज कल रात नहीं होती, सुबह हो जाती है , जब मै आँख खोलता हूँ , तो सुबह होती है, और जब आँख बंद करता हूँ, तब रात नहीं होती. मै सोचता हूँ उसका घर कहाँ है , उसके भाई-बहन कौन है , उसके माँ-बाप कौन है, या अकेली है रात ? सबके तन्हाई की संगनी , चाँद की रागनी, कवियों के कुंठा की गवाह, आखिर कहाँ खो गयी है रात.

लोगो ने हाथ उठाना सिखा दिया.

किसी ने हाथ पकड़ कर, चलना सिखा दिया, किसी ने हाथ में हाथ लेकर , चलना सिखा दिया. किसी ने मुझे आगे आकर , हाथ बड़ना सिखा दिया, अब तो लोगो ने , हाथ उठाना सिखा दिया.

सपनो में जीना एक बुरी आदत

सपनो में जीना एक बुरी आदत देख सपने ,खूब देख, हो सके तो उन्हें पूरा कर, पर सपनो में जीना एक बुरी आदत है. करो ,कई काम करो, सही,गलत, मजेदार,उबाऊ पर कामो में खो जाना एक बुरी आदत है. जियो हर तरह की जिन्दगी जियो, सफल,असफल, अच्छे,गंदे, एक साथ कई रास्ते, पर भ्रम में जीना एक बुरी आदत है.

हाय रे ! बेशर्म मोर्चा

हाय रे ! बेशर्म मोर्चा मांस ,मदिरा,महिला में डूबे, लोगो को अब घंटी सुनाई नहीं देती, खतरे की, वे उन्मुक्त है , और अब उन्हें , प्रमाण-पत्र चाहिए नंगे घुमने के लिए, हाय रे ! बेशर्म मोर्चा . दोष उनका है नहीं, क्यों कि वे जिस देवता के ये पुजारी है, उसे बस व्यापार दीखता है, देह में,दिमाग में, दावा में ,दारु में, माँ में,बहन में,बेटी में, हाय रे ! भारत हाय रे ! बेशर्म मोर्चा .

खुशबू आज भी बागो में है

खुशबू आज भी बागो में है , तितलिया भी है , पर भवरे अब रसिक नहीं रहे. अब वो कातिल हो गए है. नदी आज भी है, लहरे भी है, पूजा आज भी होती है, पर ये अब गन्दी हो गयी है.