खुशबू आज भी बागो में है

खुशबू आज भी बागो में है ,
तितलिया भी है ,
पर भवरे अब रसिक नहीं रहे.
अब वो कातिल हो गए है.
नदी आज भी है,
लहरे भी है,
पूजा आज भी होती है,
पर ये अब गन्दी हो गयी है.

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