हम जकड़े हुए है खुद के जाल में
हम जकड़े हुए है खुद के जाल में,
हमारी कमजोरिया ,
हमारे भय,
हमारे तनाव ,
हमारी मजबुरिया,
हमारी बुरी आदते,
हमे खाए जाती है.
हम जकड़े हुए है खुद के जाल में,
आलस ने घेर रखा है,
गुस्सा आगे नहीं बड़ने देती,
तन्द्रा के शिकार हम,
खुद पर विश्वास खो बैठे है.
हम जकड़े हुए है खुद के जाल में,
भ्रम फैला है चारो तरफ,
फैसले नहीं ले पाते हम ,
किस गली हमे जाना है,
एक गली जाते है,
फिर लौट कर दूसरी गली पकड लेते है,
फिर तीसरी,चौथी,अनंत गलिया है,
और हर गली में हम जाना चाहते है,
और अंत में हम कही नहीं जा पते,
क्यों की हम जकड़े हुए है खुद के जाल में.
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