भूख की मारी जनता

भूख की मारी जनता,
लाठी खाने को तैयार है,
पानी जब घर में घुस गया है,
बुड्डे भी तैरने को तैयार है.
यह भूख की मरी जनता है,
बिक जाती है दो रोटी पर,
अब जब रोटी भी छीन रहा है,
लड़ने को तैयार है.
यह भूख की मरी जनता है,
इसे आसरा चाहिए बस कल का,
एक घर अपनी बच्चो के लिए,
और एक छोटा आश्वासन ,
कि वह अपनी कोने में बस जी सके,
लेकिन इतना भी जब नहीं मिल रहा,
वह सब कुछ खोने को तैयार है.

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