तू चुप हो
जब तुम्हे पहली बार देखा ,तुम चुप थी
और जब आज देख रहा हूँ ,तू चुप हो .
पहले जब तुम हंसती थी तो चुप थी
तुम कुहक रही हो आज ,तुम चुप हो .
पहले जब हिलोरे थी,तुम चुप थी,
अब सागर गंभीर है ,तुम चुप हो.
पहले मिर्च तुम सहर्ष खाती थी तो चुप थी ,
आज मिष्ठान भी तीखे लगते है तो चुप हो .
तुम दौड़ कर आती थी खिड़की पर ,तुम चुप थी
आज चारदीवारी में कैद हो फिर भी तुम चुप हो.
पहले जब तुम्हे संसार की चिंता नहीं थी ,तुम चुप थी
आज जब संसार के लिए जी रही हो तो चुप हो .
पहले तुम कितनी तेज चद्ती थी सीडियां ,तुम चुप थी,
आज सिडियो पर पैर हिलते है ,तुम चुप हो .
पहले तुम अपने हाथो से खिलाती थी तो चुप थी
अब हाथ बंधे है ,तुम चुप हो .
पहले मई दिन-भर बक-बक करता ,तुम चुप थी
अब सालो से चुप हूँ तो भी तुम चुप हो .
पहले तुम मुझसे लडती थी तो चुप थी
आज मेरे शब्दों के लिए तरसती हो तो चुप हो.
पहले रोती थी उसमे भी रंजन होता ,तुम चुप थी
आज हंसती हो उसमे भी क्रंदन होता है ,तुम चुप हो .
पहले मेरी कविताओ में फरेब होता था तो तुम चुप थी
आज जब मैं सच लिखता हूँ तो भी तुम चुप हो.
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