मै मौन रहूँगा
मै मौन रहूँगा
कुछ न कहूँगा
जलता है दीप धीरे -धीरे
मैं भी जलूँगा .
रात बीत जाती है ,
नींद नहीं आती है
फिर भी मैं चुप रहूँगा
मैं मौन रहूँगा
कुछ न कहूँगा .
लहरे उठती है सागर में
पानी भरता है गागर में ,
दर्शन-मात्र से तेरे ,
मैं खुश रहूँगा
मै मौन रहूँगा
कुछ न कहूँगा
सावन बरसता है
प्यास मिटता है
नदी के तट पर
मैं प्यासा रहूँगा
फिर भी कुछ न कहूँगा .
मैं मौन रहूँगा
कुछ न कहूँगा
बजती है वीणा धीरे-धीरे ,
मधुर बांसुरी कि तान पर ,
मोर बनूँगा ,
फिर भी कुछ न कहूँगा.
मैं मौन रहूँगा
कुछ न कहूँगा
उगता है सूरज रोज़ ,
सूरजमुखी बने है लोग ,
तुम रंग खेलो
मैं प्रतिकार नहीं करूँगा ,
फिर भी कुछ न कहूँगा
मैं मौन रहूँगा
कुछ न कहूँगा
फूल उगते है बाग़ में लाल ,
मै देवता के चरणों का धुल बनूँगा
फिर भी कुछ न कहूँगा .
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