जिन्दा हूँ मै

सपने देखता हूँ,
इसलिए जिन्दा हूँ मै,
आगे इक लम्बी सुरंग है 
सुनसान और अकेला,
अन्धकार है केवल अन्धकार ,
आशा का दीप जलाये हुए हूँ,
इसलिए जिन्दा हूँ मै.
आगे पत्थर है,
रोड़े है सडको पर ,
हर कदम पर ढोकर लगता है,
उत्साह कि दौड़ लगाए हुए हूँ,
इसलिए जिन्दा हूँ मै.
नदी है मेरे चारो ओर,
समुन्द्र घेर कर बैठा है ,
लहरे मुझे डराती रहती है,
पतवार थाम कर बैठा हूँ,
इसलिए जिन्दा हूँ मै.
भीड़ में अकेला हूँ,
कोई साथ नहीं है मेरे,
खुद ही खुद से लड़ता हूँ,
अपने आप को थाम कर बैठा हूँ,
इसलिए जिन्दा हूँ मै.
हर युद्ध हारा हूँ,
हर मैदान में मुकी खायी है,
जीत चिढाती है मुझे ,
हाथ में तलवार लिए बैठा हूँ,
इसलिए जिन्दा हूँ मै.
सड़के खून कि प्यासी है,
नदिया जान क़ी,
नेता हमारे पैसे के पीछे पड़े है,
खुद को छुपाये हुए हूँ,
इसलिए जिन्दा हूँ मै.

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