मौत कि मुस्कान .
कई बार सोचा ,
कैसी होती है हंसी ,
कैसी होती है जिन्दगी ,
कैसी होती है मुस्कान,
लेकिन देखा आज बीच बाज़ार ,
एक बुडिया लिए हाथ में झोली ,
दे रही थी पुकार बारम्बार ,
बुडिया को मिले थे सिक्के दो-चार ,
एकाएक मत गयी भगधड,
मच गया हाहाकार ,
फिर शांति छा गयी कुछ देर बाद,
बुडिया अब भी रही थी पुकार ,
लेकिन अब उसे गोली लगी थी,
सिक्के बिखरे थे दो -चार ,
मैंने सोचा ऐसी होती है मौत कि मुस्कान .
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