सवाल है
यह गिला- गिला पानी,
न स्वाद, न रंग , न संग ,
संरचना ,आवश्कता और लक्ष्य ,
सवाल है नाली, गंगा या समुन्द्र ,
सिमित जीवन,अभिलाषाए अनंत ,
अपनी प्रकृति, उदासीनता ,
आदत,आलस और यह समय.
यह झुकी- झुकी अनार की लताएँ
हरी-भरी,सुंदर,कोमल,समर्थ
झुकना ही पहचान ,मदद,नमन,
लक्ष्य सुंदर, मीठे ,रसीले फल,
सवाल है दब्बूपन ,दासता या हीनता ?
यह चौबीसों घंटे जुड़े हाथ ,
उच्च शिक्षा,उच्चे पद ,सूरजमुखी बने है सर,
स्वाभिमान,मर्यादा या चापलूसी धर्म ?
यह सुखा -सुखा धुल,
हर पल,हर कण गगंमुखी ,
सड़क की मिटटी ,बल्लो का डेर,
सभागारों में अठखेलियाँ ,
सवाल है योगता,लिंग या आसन ?
हर गली दुकान,हर चौराहा मकान,
पैदल हाफते,दौड़ते गर्मी में एकलव्य ,
धन,बल, जन्म पैमाना कौन ?
यह कस्तूरी मृगो का मेला ,
गीधो का हर मोड़ पर डेरा,
साथ में सियारों की लम्बी कतार,
सवाल है भोले कहा जाये ?
हर अखबार बिकाऊ,टीवी अंधी,
चारो तरफ चकाचौध,राहे बेअंत ,
दिमाग,देह,दमन,मन,स्तन,
मेरी उर्जा किथर जाये ?
या श्वेत-श्वेत सूर्य ,
जिसके अंदर सारे रंग,
सारा जीवन,सारे लक्ष्य ,सारा गगन,
प्रतिभा ,लगातार मेहनत,अच्छी सोच,
बाहर भरी भीड़,एक दरवाजा ,बंद
सवाल है हिम्मत,धोर्य ,विश्वास या विप्लव ?
यह नीला- नीला आकाश ,
जिसका न कोई आदि ,न कोई अंत
दूर खड़ा वो हिमालय ,उच्ची चोटी
यह जीवन की परीक्षा ,
और दूर खड़ा मै,
मेरे सपने ,मेरा संकल्प ,मेरा मेहनत
और इस देश में मेरा भाग्य ?
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