जिन्दगी रूठ गयी है
जिन्दगी रूठ गयी है,
और लोग मुझे अकेले होने नहीं देते.
इस अँधेरी रात में ,दरवाजे सारे बंद है
और लोग मुझे सोने भी नहीं देते.
नदी, नाले सब सूखे पड़े है,
और लोग मुझे रोने भी नहीं देते.
तोड़ दिए सारे धागे ,छोड़ दी है डोरी,
पतंग को लोग मेरे खोने नहीं देते.
और लोग मुझे अकेले होने नहीं देते.
इस अँधेरी रात में ,दरवाजे सारे बंद है
और लोग मुझे सोने भी नहीं देते.
नदी, नाले सब सूखे पड़े है,
और लोग मुझे रोने भी नहीं देते.
तोड़ दिए सारे धागे ,छोड़ दी है डोरी,
पतंग को लोग मेरे खोने नहीं देते.
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