मेरे जिंदगी के पन्ने फटे जा रहे है.

मैं अकेला हूँ,
मुझे उजाला नहीं चाहिए ,
मैं काली रोशनी चाहता हूँ,
मुझे भीड़ का हो-हल्ला पसंद नहीं,
मैं सुबह का सन्नाटा चाहता हूँ.
मेरा विश्वास खो गया है ,
जिसके सहारे मै लड़ता हूँ,
अब मै ॐ का लगातार जाप करता हूँ,
ताकि सामर्थ्य ,सततता और संस्कार
फिर अपने झोली में बटोर सकूँ.
मैंने बहुत कुछ खो दिया है ,
जैसे बल,विश्वास और विवेक ,
मैं लगातार छीजता जा रहा हूँ ,
जैसे चूतड के पीछे का पैजामा .
मैं बहुत शांत बैठा हूँ,
क्योंकि मुझे कही नहीं जाना ,
मैं आंख बंद कर के बैठा हूँ,
क्योंकि मेरे जिंदगी के पन्ने फटे जा रहे है.

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