प्रत्येक प्रतिबिम्ब में एक छाया दीखता है , तुम्हारे छललाई आँखों के पानी में , मुझे सागर का काया दीखता है, नदी में डूब चूका हूँ , अब तेरे अलसाई आँखों की , गहराई में गोता लगाना चाहता हूँ, मै तुम्हारी आँखों में पल-पल घुल कर ,
प्रत्येक प्रतिबिम्ब में एक छाया दीखता है ,
तुम्हारे छललाई आँखों के पानी में ,
मुझे सागर का काया दीखता है,
नदी में डूब चूका हूँ ,
अब तेरे अलसाई आँखों की ,
गहराई में गोता लगाना चाहता हूँ,
मै तुम्हारी आँखों में पल-पल घुल कर ,
अपना वजूद खोना चाहता हूँ,
हां मै तुम्हे प्यार करना चाहता हूँ.
मै बहुत बार गया वहां ,
जहाँ अंतिम बार मिला था तुमसे ,
घंटो इंतज़ार किया ,
कि
शायद ,शायद तुम आ जाओ ,
लेकिन तुम फिर कभी नहीं आई ,
और हर बार मै मायूस लौट आया .
तुमसे एक बार मिलना चाहता हूँ ,
ताकि मै बतला सकूँ ,हां मै सच हूँ ,
ताकि
उस प्रत्येक क्षण कि याद दिला सकूं ,
जिसे तुने मुझे दिया था,
हां मै तुम्हे प्यार करना चाहता हूँ.
सपने में तुम्हारी आवाज सुनता हूँ,
गंगा नदी के एकांत किनारे ,
तुम्हरे गले में बांहे डाले,
तुम्हारे गोद में खोया,
मै तेरे बालो से खेलना चाहता हूँ,
हां मै तुम्हे प्यार करना चाहता हूँ.
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