हां मै तुम्हे प्यार करना चाहता हूँ

तुम लौट आओ ,
मैं तुमसे बहुत कुछ कहना चाहता हूँ,
मै उन क्षणों को लौटना चाहता हूँ,
जिसे मैंने पाया था सबकुछ खोकर,
हां मै तुम्हे प्यार करना चाहता हूँ..
मैंने काँटों की तो बहुत बागवानी की है ,
आंसुओ का तालाब भी खोदा है ,
दर्द का सागर तो मेरे उर में है ,
पग-पत्थर तो मेरे जीवनसाथी है,
मैंने मुरझाये हुए बादाम बहुत लगाये है ,
लेकिन आज तुम्हे एक गुलाब देना चाहता हूँ,
हां मै तुम्हे प्यार करना चाहता हूँ..
मै जनता हूँ तेरे ऊपर क्या बिता है ,
क्या- क्या झेला है जमाने में तुमने ,
मेरे कारण रहना पड़ा है तुम्हे चारदीवारी में ,
तोतो और तालाबो से बाँटना पड़ा है दर्द,
मै जनता हूँ तेरे उर में आग पलता है अब ,
तुमरे होठो से मुहब्बत के बाण नहीं,
बगावत के प्रचंड तान निकलते है,
लेकिन फिर भी मै तुम्हे प्यार का राग सुनना चाहता हूँ,
हां मै तुम्हे प्यार करना चाहता हूँ..
मुझे आज भी याद है वो क्षण ,
जब तुमने मेरे घुटने पर पट्टी लगाया था,
और सर्द-सुबह में मेरे कापते होठो को सहारा दिया था ,
मै भूल नहीं पाता तेरे जन्मदिन का खीर ,
तेरे बांहों के सहारे सीखी लिखावट ,
मै उन सभी बीते क्षणों के सहारे लौटना चाहता हूँ,
हां मै तुम्हे प्यार करना चाहता हूँ..

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